दो जुलाई 2020 की रात बिकरू गांव में बहा 8 पुलिस वालों खून foto NEWS With RAHUL TRIPATHI

मुठभेड़ में ढेर अमर दुबे की 29 जून को कुख्यात विकास दुबे ने कराई थी शादी
- अमर दुबे की दुल्हन सहित मां-पिता, बहन पुलिस हिरासत में
- अमर दुबे की शादी में विकास दुबे के घर पहुंचे थे कई पुलिसकर्मी व प्रधान
बिल्हौर। कुख्यात अपराधी विकास दुबे घटना के बाद अभी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका है, लेकिन उसके गुर्गों का काम तमाम करने में पूरे प्रदेश की पुलिस कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। विकास दुबे के साथ घटना के लिप्त अमर दुबे पुत्र संजीव उर्फ संजू को पुलिस ने हमीरपुर मौदहा में मार गिराया है। मालूम रहे कि अमर दुबे की शादी अभी 29 जून को विकास दुबे क ी कोठी पर ही हुई थी, घटना के बाद से अमर तो फरार था, लेकिन पुलिस ने उसकी नवविवाहिता सहित पूरे परिवार को हिरासत में ले रखा है। उधर पुलिस द्वारा लगातार तड़ातड़ विकास और उससे जुड़े लोगों का काउंटर कर दिए जाने से गांव में मातम सा माहौल है।
बुधवार को चौबेपुर में पुलिस मुठभेड़ में घायल श्यामू बाजपेई के बिकरू स्थित गांव में महिलाएं बच्चे भी भाग गए, जबकि पुलिस ने श्यामू के घर के पुरुषों-युवकों को पहले से ही हिरासत में ले रखा है। श्यामू की पड़ोसी पारिवारिक बुर्जुग अन्नपूर्णा बाजपेई ने बताया कि भइया विकास के हियन तो रोज हाय-हत्या होत ती, हमें कुछ नाई पता, हम सब बहुत परेशान हन। इसी तरह कुख्यात विकास दुबे का दायां हाथ कहे जा रहे हमीरपुर मौदहा में पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुए अमर दुबे पुत्र संजीव उर्फ संजू के घर पर भी उसकी बुर्जुग दादी ज्ञानवती मिलीं, वह विकास दुबे के पालतू कुत्ते के संग पति और पुत्र संजू व पूरे परिवार को पुलिस द्वारा ले जाने और खोजबीन के नाम पर घर में रखे सामान को तोडऩे की बात कहने लगी। मुठभेड़ में नाती अमर दुबे की मौत की जानकारी तक उनके पास नहीं थी। ज्ञानवती ने बताया कि नाती अमर दुबे की शादी 29 जून को पनकी से होने बात कहीं। अमर दुबे के घर के समीप ही तीन जुलाई को पुलिस मुठभेड़ में मारे गए अतुल दुबे का भी मकान है, जो घटना के बाद से पूरी तरह खुला पड़ा है और घर का सामान पूरी तरह बिखरा होने के बाद भी कोई भी घर का सदस्य उठाने वाला नहीं है।
-----------------------------------------------
कार्ड नाहीं छपाय, जलदी मा हुईं विकास हियन भै ती शादी
बिल्हौर। हमीरपुर मौदहा में कु ख्यात अपराधी विकास दुबे क ा शार्प शूटर अमर दुबे की मुठभेड़ में मौत हो चुकी है। अमर की बुर्जुग दादी ज्ञानवती ने बताया कि अभी 29 जून को तो घर में नई बहू आई ती, लेकिन सब कुछ अब सत्यानाश हुई गौ। हाय विकास पंडित के कहिबे पर संजुआ ने बिना कार्ड छपाय, मुर्हूत न विचराव, पुलिस ने सब घर को समान तोडड़ालो है, बहू, बच्चा तक पुलिस वाले लिवाय लै गए हैं। हर घंटा कोई न कोई घर पूछताछ करन चलो आवत है, लेकिन सब कहां हैं कोई न बताउत।
---------------------------
इंसेट-२
अमर दुबे की शादी में शामिल हुए थे कई पुलिस वाले व प्रधान
बिल्हौर। कुख्यात विकास दुबे की सरपरस्ती में उसके शार्प सूटर व उसके पारिवारिक भतीजे अमर दुबे पुत्र संजू की शादी पनकी कानपुर से 29 जून को ही हुई थी। सूत्रों की माने तो इसमें चौबेपुर थाने के कई पुलिस के कर्मियों सहित क्षेत्र के कई ग्राम प्रधान और विकास के गुर्गें शामिल हुए थे। देर रात में विकास की कोठी पर विविध चर्चाएं भी हुईं थीं।





कुख्यात विकास अपने करीबियों के शस्त्र लाइसेंस बनवा उन्हें अपने संग था रखता

-  विकास दुबे ने कई करीबियों के बनवा देता था शस्त्र लाइसेंस
- राजनैतिक समारोह में शस्त्रों लैस होकर इलाकों में था आता जाता
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर। पुलिस क्षेत्राधिकारी सहित आठ पुलिस कर्मियों को मौत की नींद सुलाने वाला कुख्यात अपराधी विकास दुबे क्षेत्र में अपनी आपराधिक हनक और राजनैतिक पकड़ के लिए जाना जाता रहा है। वह जहां पंचायत चुनावों में अपने परिवारिकजनों, समर्थकों, गुर्गों को ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य सहित अन्य क्षेत्रीय चुनाव जितवाता था, वहीं अपनी राजनैतिक रसूक का इस्तेमाल कर अपने हितैषियों की लाइसेंसी राइफल, रिवाल्वर व बंदूक भी बनवा था और आपात स्थित में इसी असलहाधारियों के साथ क्षेत्र में अपनी हनक भी बनाता था।
दो जुलाई की रात बिकरू गांव में कुख्यात विकास दुबे द्वारा किए गए रक्तपात से देश-प्रदेश में खलबली है, लेकिन विकास दुबे का चौबेपुर, शिवराजपुर और ककवन विकास खंड क्षेत्र के कई ऐसे ग्राम प्रधान बेहद करीबी है जिनके पास एक नहीं बल्कि दो-दो, तीन-तीन सरकारी असलहों के लाइसेंस है। सूत्रों ने बताया कि विकास दुबे की आपराधिक छवि होने और दर्जनों गंभीर मुकदमों के कारण उसके शस्त्र लाइसेंस बनना तो संभव नहीं था इसलिए उसने बिकरू और उसके आसपास गांवों में अपने दर्जनों करीबी ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, ठेकेदारों, धनाड्यजनों आदि के राइफल, रिवाल्वर, बंदू, डबल बैरल शस्त्रों के लाइसेंस बनवा रखे हैं और जरूरत पडऩे पर चुनाव के दौरान यह शस्त्रधारी ही उसके आगे पीछे चलकर उसकी हनक बनते रहे हैं। चौबेपुर, शिवराजपुर और ककवन कुख्यात विकास दुबे के हमदम रहे ऐसे प्रधान, पूर्व प्रधान, वर्तमान व पूर्व जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और कई अन्य चुनाव लड़ चुके लोगों की लंबी सूची है। वर्ष 2017 में विकास आम्र्स एक्ट में ही लखनऊ एसटीएफ ने पकड़ा था।
***********************************************************************************
विकास दुबे घर के समीप स्थित कुआं व निचली गंग नहर व पांडू नदी में फंके  जाने की आशंका
राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर।
दो जुलाई की रात बिकरू गांव में सीओ बिल्हौर, एसओ शिवराजपुर सहित आठ पुलिस कर्मियों की हत्या के अलावा अन्य दबिश देने गए पुलिस टीम से विकास दुबे और उसके गैंग ने हथियार भी लूट लिए थे। घटना को अंजाम देने के बाद बदमाश मौके से भाग गए थे, तभी से पुलिस लगातार गायब हुए हथियारों का पता लगाने में जुटी है।
मंगलवार को आलाधिकारियों के निर्देश पर बिकरू गांव में तैनात पुलिस ने विकास दुबे की कोठी जो कि अब मलबा बन गई है उसकी गहन तालाशी ली। पुराने घर के मलबे में पुलिस सिपाहियों को तीन जिंदा देशी बम मिले, जिन्हें पूरी सर्तकता के साथ पानी में डालकर निष्क्रिय कर दिया गया। वहीं जांच अधिकारियों को विकास दुबे के घर के समीप स्थित एक कुएं में भी हथियार फेंक दिए जाने की आशंका है, जिसको लेकर सोमवार को जाल-कांट कुएं में डलवाया गया था, पर कोई हथियार हाथ नहीं लग सका था, जिस पर अधिकारियों ने कुआं का पानी पंपिंग सेट से निकलवा कर जांच के आदेश दिए हैं। उधर सूत्रों ने आशंका जताई है कि पुलिस टीम पर हमले की सूचना के बाद चौकन्ना हुई पुलिस घेराबंदी को देखते हुए कुख्यात विकास दुबे घटना के फौरन बाद ही अपने साथियों संग पूरे लूटे हथियारों संग भाग गया। यदि उसने हथियार छिपाए भी होंगे तो गांव के समीप स्थित पांडू नदी और निचली गंग नहर के समीप स्थित झाडिय़ां या फिर अन्य गांवों में अपने गुर्गों के यहां छुपाएं होंगे।
********************************************************************************
पुलिस ने बिकरू गांव में घटनास्थल के समीप से बरामद की दो बाइक
- घटना के बाद मौके पर ही खड़ी हैं दो बाइकें , नंबरों के आधार पर होगी जांच
- प्रारंभिक जांच में एक बाइक भीटी प्रधान व दूसरी बाइक गोविंद नाम के ग्रामीण की बताई गई
राहुल त्रिपाठी

बिल्हौर। बिकरू गांव में आठ पुलिस कर्मियों को मौत के घाट उतारने वाले विकास दुबे के पास घटना के समय आस-पास गांव के कई ग्राम प्रधान व इलाकाई समर्थक भी थे। जांच पड़ताल के अब इसका खुलासा हुआ है। घटना के बाद से कुख्यात विकास दुबे के घर के पास से पुलिस को संदिग्ध हालत में खड़ीं दो बाइकें मिली हैं। पुलिस को आशंका है यह बाइक घटना के पूर्व ही बिकरू गांव आईं थी, पुलिस ने दोनों बाइक को कब्जे में लेकर उनके नंबरों के आधार पर मामले की जांच शुरू की है।
दो जुलाई को बिकरू गांव में खूनी खेल खेलने वाला विकास दुबे के संग उसके गुर्गों के अलावा इलाके के कई ग्राम प्रधान व असलहाधारी लोग भी मौजूद थे। लगातार जारी जांच में इसकी पुष्टि हुई है। मंगलवार को पुलिस जांच में नामजद किए गए विष्णू पाल उर्फ जिलेदार सिंह निवासी सुज्जा निवादा जो कि वर्तमान में ग्राम प्रधान भीटी ग्राम पंचायत है उसकी बाइक विकास दुबे के घर के समीप घटनास्थल पर मिली है। इसके साथ ही एक अन्य बाइक भी पुलिस को घटनास्थल के समीप से बरामद हुई जिसका पंजीयन गोविंद तिवारी के नाम से सामने आया है। पुलिस आलाधिकारियों के निर्देश पर विकास दुबे की कोठी के मलबे पर मंगलवार को जांच टीम को देशी जिंदा बम भी मिले जिन्हें पानी में डालकर निष्क्रिय किया गया, जबकि बिकरू गांव में गोपाल सैनी, ममता दुबे, हीरू पंडित आदि संदिग्ध ग्रामीणों के घर पर पुलिस ने अंदर घुस सघन जांच पड़ताल की साक्ष्य जुटाए।




























आईजी लखनऊ जोन ने 6 घंटे खंगाला सीओ बिल्हौर का दफ्तर
- कंप्यूटर सीपीयू, कार्यालय में तैनात 12 कर्मियों, इंसपेक्टर बिल्हौर से लिए लिखित और मौखिक बयान
- डिस्पैच रजिस्टर सहित चौबेपुर थाना और तत्कालीन एसएसपी-डीआईजी को लिखे पत्रों से संबंधित अभिलेख लिए कब्जे में

राहुल त्रिपाठी
बिल्हौर।
दो जुलाई की रात बिकरू गांव में कुख्यात विकास दुबे गैंग की गोली का शिकार हुए सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्र के कार्यालय की जांच के लिए पहुंची आईजी लखनऊ जोन ने करीब चार घंटे तक बारी-बारी से कई पहलुओं पर जांच की। इंसपेक्टर बिल्हौर सहित सीओ कार्यालय में तैनात लिपिकीय सिपाहियों और डाक ले जाने वाले सिपाही सहित कंप्यूटर आपरेटर से भी आईजी ने मौखिक और लिखित बयान दर्ज किए। इसके अलावा लखनऊ और कानपुर से आई फोरेंसिक टीमों ने संयुक्त रूप से पहले कोतवाली बिल्हौर के फिर सीओ कार्यालय के कंप्यूटर और कई अभिलेखों, डिस्पैच रजिस्टरों आदि को सीलकर कब्जे में ले लिया। आईजी ने बिना अनुमति के कार्यालय ने छोडऩे के आदेश भी जारी किए हैं।
मंगलवार सुबह करीब 10 बजे आईजी लखनऊ जोन लक्ष्मी सिंह बिकरू गोलीकांड में शहीद होने वाले पुलिस क्षेत्राधिकारी बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा के कार्यालय पहुंची। आईजी के आते ही सीओ कार्यालय के  एक दर्जन वरिष्ठ-कनिष्ठ पुलिस लिपिकों में से पुष्पेंद्र यादव, जितेंद्र कुमार, शैलेंद्र सिंह, कु0 सरिता सहित सभी कर्मियों से पहले पूरे मामले को लेकर चर्चा की। इसके बाद एक-एक कर सभी कार्यालय स्टाप से अलग-अलग मौखिक पूछताछ की। इसके बाद कार्यालय पहुंची फोरेंसिक टीम ने पहले बिल्हौर कोतवाली का फिर सीओ कार्यालय के अलग-अलग एंगल से वीडियोग्राफी कर फोटोग्राफ भी लिए। इसके बाद जांच अधिकारियों ने दोनों दफ्तरों के कंप्यूटर सीपीओ भी सीलकर कब्जे में लिए। मालूम रहे कंप्यूटर एक्सपर्ट भी जांच में शामिल थे जो लगातार साक्ष्य जुटा रहे थे। दो बजे के बाद आईजी लखनऊ जोन जांच पूर्ण होने पर साक्ष्यों और कारणों की बात कहते हुए कानपुर की ओर रवाना हो गईं। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आईजी लखनऊ जोन दिवंगत सीओ बिल्हौर द्वारा तत्कालीन एसएसपी अनंत देव को लिखे चौबेपुर एसओ विनय तिवारी से संबंधित अभिलेखों और वायरल एक पत्र की पूछताछ तैनात कार्यालय सिपाहियों से प्रमुख रूप से किया।


































































































































































































Comments